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"જો તમારી અંદર પ્રતિભા હોય તો તમે જરૂર સફળ થશો પછી ભલે પરિસ્થિતીઓ કેટલી પણ વિપરીત કેમ ન હોય તે તમને સફળતાની ઉડાન ભરવાથી ક્યારેય રોકી શકશે નહી"

14 November, 2020

जवाहरलाल नेहरू जीवनी

 जवाहरलाल नेहरू


नाम : जवाहरलाल मोतीलाल नेहरु।

जन्म : 14 नवंबर 1889 इलाहबाद, उत्तर-पश्चिमी प्रान्त, ब्रिटिश भारत ।

मृत्यु : 27 मई 1964 (उम्र 74) नई दिल्ली, भारत।

पिता : मोतीलाल नेहरु।

माता : स्वरूपरानी नेहरु।



        जवाहरलाल नेहरु भारत के पहले प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता के पहले और बाद में भारतीय राजनीती के मुख्य केंद्र बिंदु थे। वे महात्मा गाँधी के सहायक के तौर पर भारतीय स्वतंत्रता अभियान के मुख्य नेता थे जो अंत तक भारत को स्वतंत्र बनाने के लिए लड़ते रहे और स्वतंत्रता के बाद भी 1964 में अपनी मृत्यु तक देश की सेवा की। उन्हें आधुनिक भारत का रचयिता माना जाता था। पंडित संप्रदाय से होने के कारण उन्हें पंडित नेहरु भी कहा जाता था। जबकि बच्चो से उनके लगाव के कारण बच्चे उन्हें “चाचा नेहरु” के नाम से जानते थे।



आरम्भिक जीवन :

        जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर 1889 को ब्रिटिश भारत में इलाहाबाद में हुआ। उनके पिता, मोतीलाल नेहरू (1861–1931), एक धनी बैरिस्टर जो कश्मीरी पण्डित समुदाय से थे, स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष चुने गए। उनकी माता स्वरूपरानी थुस्सू (1868–1938), जो लाहौर में बसे एक सुपरिचित कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से थी, मोतीलाल की दूसरी पत्नी थी व पहली पत्नी की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई थी। जवाहरलाल तीन बच्चों में से सबसे बड़े थे, जिनमें बाकी दो लड़कियाँ थी।

        बड़ी बहन, विजया लक्ष्मी, बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनी। सबसे छोटी बहन, कृष्णा हठीसिंग, एक उल्लेखनीय लेखिका बनी और उन्होंने अपने भाई पर कई पुस्तकें लिखी। 1890 के दशक में नेहरू परिवारजवाहरलाल नेहरू ने दुनिया के कुछ बेहतरीन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त की थी।

        उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो से और कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज, लंदन से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने अपनी लॉ की डिग्री कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पूरी की। इंग्लैंड में उन्होंने सात साल व्यतीत किए जिसमें वहां के फैबियन समाजवाद और आयरिश राष्ट्रवाद के लिए एक तर्कसंगत दृष्टिकोण विकसित किया।

        जवाहरलाल नेहरू 1912 में भारत लौटे और वकालत शुरू की। 1916 में उनकी शादी कमला नेहरू से हुई। 1917 में जवाहर लाल नेहरू होम रुल लीग‎ में शामिल हो गए। राजनीति में उनकी असली दीक्षा दो साल बाद 1919 में हुई जब वे महात्मा गांधी के संपर्क में आए। उस समय महात्मा गांधी ने रॉलेट अधिनियम के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था। नेहरू, महात्मा गांधी के सक्रिय लेकिन शांतिपूर्ण, सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रति खासे आकर्षित हुए।


राजनीतिक जीवन :

        1926 से 1928 तक, जवाहर लाल ने अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव के रूप में सेवा की ।1928-29 में कांग्रेस के वार्षिक सत्र का आयोजन मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में किया गया। उस सत्र में जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चन्द्र बोस ने पूरी राजनीतिक स्वतंत्रता की मांग का समर्थन किया जबकि मोतीलाल नेहरू और अन्य नेता ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर ही प्रभुत्व सम्पन्न राज्य चाहते थे।

        इस मुद्दे के हल के लिए, गांधी ने बीच का रास्ता निकाला और कहा कि ब्रिटेन को भारत के राज्य का दर्जा देने के लिए दो साल का समय दिया जाएगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस पूर्ण राजनैतिक स्वतंत्रता के लिए एक राष्ट्रीय आंदोलन शुरू करेगी। नेहरू और बोस ने मांग की कि इस समय को कम कर के एक साल कर दिया जाए। ब्रिटिश सरकार ने इसका कोई जवाब नहीं दिया।

        दिसम्बर 1929 में, कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन लाहौर में आयोजित किया गया जिसमें जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष चुने गए। इसी सत्र के दौरान एक प्रस्ताव भी पारित किया गया जिसमे ‘पूर्ण स्वराज्य’ की मांग की गई और 26 जनवरी 1930 को लाहौर में जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत का झंडा फहराया। गांधी जी ने भी 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन का आह्वान किया। आंदोलन काफी सफल रहा और इसने ब्रिटिश सरकार को प्रमुख राजनैतिक सुधारों की आवश्यकता को स्वीकार करने के लिए मजबूर कर दिया ।

        1929 में जब लाहौर अधिवेशन में गांधी ने नेहरू को अध्यक्ष पद के लिए चुना था, तब से 35 वर्षों तक- 1964 में प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए मृत्यु तक, 1962 में चीन से हारने के बावजूद, नेहरू अपने देशवासियों के आदर्श बने रहे। राजनीति के प्रति उनका धर्मनिरपेक्ष रवैया गांधी के धार्मिक और पारंपरिक दृष्टिकोण से भिन्न था। गांधी के विचारों ने उनके जीवनकाल में भारतीय राजनीति को भ्रामक रूप से एक धार्मिक स्वरूप दे दिया था।

        गांधी धार्मिक रुढ़िवादी प्रतीत होते थे, किन्तु वस्तुतः वह सामाजिक उदारवादी थे, जो हिन्दू धर्म को धर्मनिरपेक्ष बनाने की चेष्ठा कर रहे थे। गांधी और नेहरू के बीच असली विरोध धर्म के प्रति उनके रवैये के कारण नहीं, बल्कि सभ्यता के प्रति रवैये के कारण था। जहाँ नेहरु लगातार आधुनिक संदर्भ में बात करते थे। वहीं गांधी प्राचीन भारत के गौरव पर बल देते थे।

        देश के इतिहास में एक ऐसा मौक़ा भी आया था, जब महात्मा गांधी को स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पद के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल और जवाहरलाल नेहरू में से किसी एक का चयन करना था। लौह पुरुष के सख्त और बागी तेवर के सामने नेहरू का विनम्र राष्ट्रीय दृष्टिकोण भारी पड़ा और वह न सिर्फ़ इस पद पर चुने गए, बल्कि उन्हें सबसे लंबे समय तक विश्व के सबसे विशाल लोकतंत्र की बागडोर संभालने का गौरव हासिल भी हुआ।  


विचार :

1. 
नागरिकता देश की सेवा में निहित है।
2. 
संस्कृति मन और आत्मा का विस्तार है।
3. 
असफलता तभी आती है जब हम अपने आदर्श, उद्देश्य, और सिद्धांत भूल जाते हैं।
4. 
दुसरों के अनुभवों से लाभ उठाने वाला बुद्धिमान होता है।
5. 
लोकतंत्र और समाजवाद लक्ष्य पाने के साधन है, स्वयम में लक्ष्य नहीं।
6. 
लोगों की कला उनके दिमाग का सही दर्पण है।

       

        नेहरू जी भारत की दुर्दशा देखकर स्वतंत्रता आदोलन में कूद पड़े । उन्हें गाँधी जी का उचित मार्गदर्शन प्राप्त हुआ । वे कई बार जेल गए । उन्होंने अपना पूरा जीवन देश के उत्थान में लगा दिया । प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने भारत को प्रगति के मार्ग पर अग्रसर किया ।27 मई 1964 को सुबह के समय पं. जवाहर लाल नेहरु  की तबीयत अचानक खराब हो गई थी, डॉक्टरों ने बताया उन्हे दिल का दौरा पङा है। दोपहर में पं. जवाहर लाल नेहरु  सभी देशवासियें को छोङकर अपने जीवन की अंतिम यात्रा पर चले गये । उनके जन्मदिन 14 नवंबर को ‘बाल दिवस ‘ के रूप में मनाया जाता है ।


 * पंडित नेहरु एक कश्मीरी पंडित थे

* नेहरू के पिता का नाम पंडित मोतीलाल नेहरू और माता का श्रीमती स्वरूप रानी था

* नेहरू अपने माता पिता की एकमात्र पुत्र थे इनकी दो बहनें भी थी

* नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष भी बनी

* पंडित नेहरू ने प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही प्राप्त की

* नेहरू की उच्च शिक्षा इंग्लैंड से हुई

* नेहरू इंग्लैंड से लौटकर बैरिस्टर हो गए पर वकालत नहीं की

* नेहरु बचपन से ही इंग्लिश स्कूल में पढ़े वह गांव में घूम-घूमकर हिंदी बोलना सीखे

* नेहरू के कपड़े धुलने को लंदन जाते थे

* नेहरु गांधी के संपर्क में आकर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे

* नेहरु जीवन के 9 साल जेल में बिताए

* गांधीजी के अपील पर जब विदेशी सामानों का बहिष्कार हो रहा था तब नेहरू ने अपने कोट को फेंककर खादी जैकेट पहन लिया था

* लाल किले पर तिरंगा फहराने वाले नेहरू पहले व्यक्ति थे

* 27 मई 1964 को हार्ट अटैक के कारण नेहरू का निधन हो गया

* नेहरू के अंतिम संस्कार में 1500000 लोग आए

* नेहरू के नाम पर एक विश्वविद्यालय है जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (J.N.U.)

* नेहरू ने संसार में शांति स्थापित करने का प्रयास किया

* 1955 में नेहरू को भारत रत्न से नवाजा गया

* नेहरू को गुलाब का फूल बहुत पसंद था जिसे वह अपनी शेरवानी में लगाकर रखते थे

* नेहरू ने डिस्कवरी ऑफ इंडिया नामक पुस्तक की रचना की थी

* इंदिरा गांधी नेहरू की पुत्री थी जो बाद में भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी

* नेहरू बच्चों को बहुत प्यार करते थे जिसके कारण बच्चे उन्हें प्यार से चाचा नेहरू कहते थे

* नेहरु के जन्म दिवस 14 नवंबर को संपूर्ण भारत में बाल दिवस के रुप में मनाया जाता है

* नेहरू पर चार बार जानलेवा हमला हुआ था

* नेहरू कई बार नोबेल के लिए नामित हुए पर प्राप्त नहीं कर सके



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